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Showing posts from May, 2021

फिर शाम को ढलते देखा

रूठी हुई थी एक अरसे से आज मना ली मैंने भीग गई थी वो उस रोज बारिश में सो आज शाम सूखा ली मैंने पहले बोली मिले नहीं तुम बहुत दिनों से क्या तुम भी रूठ गए थे मैं ख़ामोश, सोचता रहा  तुम्हें क्या पता, कमरे के दरवाज़े से हर रोज़ मैं तो तुम्हें ही झांकता रहा परिंदे  घर को लौट रहे थे चांद भी दिखा  कई रोज़ लेकिन तुम्हारे बिन दिन से सीधे रात हो गई । कुछ आप बीती मैंने, कुछ उसने सुनाई, फिर छज्जे पर बैठे हम दोनों  शाम मुस्कुराई ख़ामोशी से परिंदो को देखा उस रोज़ मैंने फिर शाम को ढलते देखा

कुछ ज़रूरी चीज़ें

          कुछ ज़रूरी चीज़ें  PhD डिग्री की सभी  formalities  को पूरा करते करते थक रही  थी लेकिन महामारी के चलते , लॉकडाउन हो गया । हर जगह से खबर आ रही है कि मरीजों को अस्पतालों में कुछ ज़रूरी चीज़ें नहीं मिल पा रही हैं ।  कॉलेज बंद होने की वजह से मुझे प्रो उपाध्याय के घर जाना पड़ा। घर के दरवाज़े पर रगों से सजे गणेश जी और बारात का आधा अधूरा सा चित्र बना हुआ था । कारीगर ब्रश से बराबर रंग भरने में लगा हुआ था । मैं डॉरवेल की तरफ बढ़  ही  रही थी लेकिन प्रो उपाध्याय ने मुझे पुकारा " प्रेमलता .. जस्ट वेट .. I am coming" मैंने फीकी मुस्कुरहाट से हां में सर हिलाया । अप्रैल की धूप में मास्क लगाए हुए मुझे देखा और पूछा घर तक आने में कोई प्रोब्लम तो नहीं हुई ? मैंने  " ना"   में जवाब दिया । इससे पहले मैं कुछ और कहती प्रो उपाध्याय कहने लगी "बेटी की शादी है घर पर .. और कुछ ज़रूरी चीज...

कितना मुश्किल है पहाड़ होना

  पहाड़ों  का रास्ता और मैं समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं । यह रास्ता कई मोड़ लेता है और अपनी दिशा बदल लेता है इस रास्ते को देखकर लगता है यह तो मेरी आत्मकथा है । पहाड़ में जन्मे हर व्यक्ति की कहानी कहता है पहाड़ तुमने पहाड़ों को बोलते हुए तो सुना ही होगा क्या तुमने कभी पहाड़ो को मरते हुए देखा है? नहीं, पहाड़ कभी नहीं मरते, ना ही कभी बूढ़े होते हैं कहानियां भी कभी नहीं मरती वो भी अमर हो जाती हैं पहाड़ों के बीच मेरे और तुम्हारे बीच क्या तुमने कभी सोचा मरने के बाद आखि़र कहां जाती होगी रूह हां.. कई बार सोचा और जबाब मिला इस जमीं और आसमां के दरमियान जो पहाड़ हैं बस, वही बस जाती है पहाड़ों को छोड़ कोई कभी जा सकता है क्या ? पहाड़ होना हल्की धुंध में लिपटे हुए पहाड़ सफ़ेद बर्फ से ढके हुए पहाड़ गिरती हुई बारिश में भीगते पहाड़ हल्की धूप में सोने से चमकते पहाड़ हमेशा ही ख़ूबसूरत होते हैं पहाड़ काश! पहाड़ भी बोल पाते कितना मुश्किल होता है पहाड़ बने रहना । पहाड़ और नदी तुम तो पर्वत हो स्थिर, विशाल शिखर से ऊंचे और तुम? तुम्हारे विपरीत, गहराई की ओर भावनाओं से भरी हुई, निरन्तर बहने वाली, नदी...