Skip to main content

Posts

Showing posts with the label storytelling

फिर शाम को ढलते देखा

रूठी हुई थी एक अरसे से आज मना ली मैंने भीग गई थी वो उस रोज बारिश में सो आज शाम सूखा ली मैंने पहले बोली मिले नहीं तुम बहुत दिनों से क्या तुम भी रूठ गए थे मैं ख़ामोश, सोचता रहा  तुम्हें क्या पता, कमरे के दरवाज़े से हर रोज़ मैं तो तुम्हें ही झांकता रहा परिंदे  घर को लौट रहे थे चांद भी दिखा  कई रोज़ लेकिन तुम्हारे बिन दिन से सीधे रात हो गई । कुछ आप बीती मैंने, कुछ उसने सुनाई, फिर छज्जे पर बैठे हम दोनों  शाम मुस्कुराई ख़ामोशी से परिंदो को देखा उस रोज़ मैंने फिर शाम को ढलते देखा