अंकल..मुझे आज ही यहां शिफ्ट करना है, मैं ज्यादा इंतज़ार नहीं कर सकती, मैंने दरवाज़े पर खड़े हुए, विनमतापूर्वक कहा । अंकल आंटी ने मुझे हैरानी से देखा, फिर आंटी ने चिंता जताते हुए कहा, "बेटा आप कैसे रहोगे आज, रूम में फर्नीचर भी नहीं है, सफ़ाई भी नहीं हुई है यहां, मुझे काफ़ी बुरा लग रहा है । मैंने मुस्कुराते हुए आंटी से कहा "आप टेंशन मत लीजिए आंटी, मैं सफाई कर लूंगी, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। रात में करीब दस बजे अंकल आंटी आए । आंटी ने पूछा "बेटा ! पीले पर्दे मिले हैं आप को कोई दिक्कत तो नहीं है ?" इस बार भी मेरा जवाब हां ही था। आंटी थोड़ी सी शख्त मिज़ाज हैं लेकिन अंकल खुश मिज़ाज हैं । पर्दे टांगने कहां हैं, कितनी दूरी पर ड्रिल करना है सब आंटी उन्हें बता बता रही थीं "अजी, जरा ध्यान से करिएगा, कितना वक्त लगा रहे हैं, जल्दी कर दीजिए । इतने में आंटी का फोन बजा, वो कॉल अटेंड करने के लिए कमरे से बाहर चली गईं । अंकल ने सीढ़ी पर खड़े रहते हुए मुड़कर पीछे देखा, ठीक है जी ? आंटी को कमरे में ना पाकर, अंकल बाहर निकल कर बोले "अजी सुनिए, एक बा...
कुछ उधड़े हुए ख़वाब बुन रही हूं...