पहाड़ों का रास्ता और मैं समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं । यह रास्ता कई मोड़ लेता है और अपनी दिशा बदल लेता है इस रास्ते को देखकर लगता है यह तो मेरी आत्मकथा है । पहाड़ में जन्मे हर व्यक्ति की कहानी कहता है पहाड़ तुमने पहाड़ों को बोलते हुए तो सुना ही होगा क्या तुमने कभी पहाड़ो को मरते हुए देखा है? नहीं, पहाड़ कभी नहीं मरते, ना ही कभी बूढ़े होते हैं कहानियां भी कभी नहीं मरती वो भी अमर हो जाती हैं पहाड़ों के बीच मेरे और तुम्हारे बीच क्या तुमने कभी सोचा मरने के बाद आखि़र कहां जाती होगी रूह हां.. कई बार सोचा और जबाब मिला इस जमीं और आसमां के दरमियान जो पहाड़ हैं बस, वही बस जाती है पहाड़ों को छोड़ कोई कभी जा सकता है क्या ? पहाड़ होना हल्की धुंध में लिपटे हुए पहाड़ सफ़ेद बर्फ से ढके हुए पहाड़ गिरती हुई बारिश में भीगते पहाड़ हल्की धूप में सोने से चमकते पहाड़ हमेशा ही ख़ूबसूरत होते हैं पहाड़ काश! पहाड़ भी बोल पाते कितना मुश्किल होता है पहाड़ बने रहना । पहाड़ और नदी तुम तो पर्वत हो स्थिर, विशाल शिखर से ऊंचे और तुम? तुम्हारे विपरीत, गहराई की ओर भावनाओं से भरी हुई, निरन्तर बहने वाली, नदी...
कुछ उधड़े हुए ख़वाब बुन रही हूं...