Skip to main content

कुछ ज़रूरी चीज़ें

         

कुछ ज़रूरी चीज़ें 

PhD डिग्री की सभी formalities को पूरा करते करते थक रही थी लेकिन महामारी के चलते, लॉकडाउन हो गया हर जगह से खबर रही है कि मरीजों को अस्पतालों में कुछ ज़रूरी चीज़ें नहीं मिल पा रही हैं । कॉलेज बंद होने की वजह से मुझे प्रो उपाध्याय के घर जाना पड़ा। घर के दरवाज़े पर रगों से सजे गणेश जी और बारात का आधा अधूरा सा चित्र बना हुआ था कारीगर ब्रश से बराबर रंग भरने में लगा हुआ था मैं डॉरवेल की तरफ बढ़ ही रही थी लेकिन प्रो उपाध्याय ने मुझे पुकारा "प्रेमलता..जस्ट वेट.. I am coming"

मैंने फीकी मुस्कुरहाट से हां में सर हिलाया

अप्रैल की धूप में मास्क लगाए हुए मुझे देखा और पूछा

घर तक आने में कोई प्रोब्लम तो नहीं हुई ?

मैंने "ना" में जवाब दिया

इससे पहले मैं कुछ और कहती प्रो उपाध्याय कहने लगी

"बेटी की शादी है घर पर..और कुछ ज़रूरी चीजें भी नहीं मिल रहीं हैं जिससे भी पूछो वो कहता है आज नहीं हो पाएगा मैडम सोचा था बेटी को बहुत धूम धाम से विदा करेंगे लेकिन समय की धूप में हमारी ख्वाहिशें कहीं जल रही हैं।

मैंने उनकी तरफ देखा और सोचा .. पीएचडी थीसिस बेटी की विदाई से कम थोड़े ही है। जहां एक तरफ खुशी और दूसरी तरफ़ विदाई का गम भी है

सोचा था आराम से काम करूंगी , हर पन्ने से लगाव जो है लेकिन लगभग 17 दिन से  दौड़ते हुए, कुछ पन्ने मैले हो गए क्योंकि कुछ ज़रूरी चीजें मुझे भी नहीं मिल रही हैं  

Comments

Popular posts from this blog

आख़िर बेटी क्यों नहीं ?

  एक दिन नीरू और SK जब मेट्रो से जा रहे थे तब सामने की सीट पर लिखा था "केवल महिलाओं के लिए "  SK अचानक बोल पड़ा .. अरे मेरी नज़र में लड़का लड़की बराबर हैं। यहां तो औरत ही औरत  की दुश्मन बनी हुई है । औरत ही नहीं चाहती कि उसे लड़की हो जाए । (S.K ने नीरू को देखकर कहा) सच कहूं S.K  मैं भी लड़की नहीं चाहती इसलिए नहीं कि मुझे बेटे की चाहत है । फिर क्या बात हो सकती है नीरू ?  बात, बात ये है कि मैं नहीं चाहती कि मेरी बेटी भी उस राह से गुजरे जिनसे मैं चल कर आई हूं । मैं नहीं चाहती कि भीड़ चलते हुए किसी दिन उसे अपने लड़की होने पर दुःख हो या बस में बीच वाली सीट पर बैठ कर उसे अपने लड़की होने का डर लगे । उसके बालों की आज़ादी पर सवाल ना उठाए जाएं, मैं नहीं चाहती कि बाल छोटे रखने पर लोग उससे सवाल करें "इतने छोटे बाल, लड़का हो क्या "?  मैं नहीं चाहती ट्रेन में बैठे हुए लोग ऊपर की बर्थ पर चढ़ते हुए टक टकी लगा कर देखें ।  मैं नहीं चाहती उसे भी हॉस्टल में एंट्री टाइम से एक सेकेंड ऊपर हो जाने पर सवाल पूछे जाए कहां घूम रहे थे, एंट्री टाइम का ध्यान कौन रखेगा । मैं नहीं चाहत...