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कविता क्या है ?

आसान सवालो के जवाब अक्सर मुश्किल होते हैं कविता क्या है कहाँ है क्यों है? ये सब है पूछते पर ये पूछता नही कोई कविता कहाँ नहीं है ? कविता क्या नहीं है? कविता मेरे अंदर भी है कविता मेरे बाहर भी है? पर सवाल यही है ? जगबीती लिखुं या आपबीती लिखुं एक बात तुम्हारी भी सही है एक बात मेरी भी सही है । कविता की कोई परिभाषा ही नही है । जो कागज़ पर सहेजा है मैंने वो कविता है जो मन पर उकेरा है मैन वो कविता है कविता मैं क्या लिखूं ये कविता मुझको दिन रात लिखती है । ये पल बीते साल लिखूं या सदियों बीती बात लिखूं । सरसों से भरा खेत लिखूं या हथेली से फिसलती रेत लिखूं आँखों से बहता प्यार लिखूं या समंदर के उस पार लिखू कविता मैं क्या लिखूं ये कविता मुझको दिन रात लिखती है । तेरी मेरी बात लिखूं या जीवन भर का साथ लिखूं फूलों सी महकती मुस्कान लिखूं या ये धरती आसमान लिखूं कविता मैं क्या लिखूं  ये कविता मुझको दिन रात लिखती है । जीवन का सार लिखू या प्रतिदिन का व्यवहार लिखूं । कोई बिछड़ा मीत लिखूं या कण में बसा संगीत लिखूं पर सवाल यही है ? जगबीती लिखुं या आपबीती लिखुं एक बात तुम्हारी भी सही है एक बात मेरी भी सही है ...

नमक और चीनी

  शाम की चाय पीते हुए मन में एक ख़्याल आया की ज़िंदगी को खट्टा मीठा बनाने के लिए चीनी और नमक, दोनो ही कितने जरूरी हैं । चाय की हर एक चुस्की मुझे यह यकीन दिलाती थी हां मीठी तो है ज़िंदगी.. उम्र के साथ थोड़ा थोड़ा अनुभव  घुलना पड़ता है । अच्छी चाय बनाने के लिए  चाय की पत्ती और दूध को पकाना जरूरी होता है ना ? और कभी अदरक के साथ पका लिया तो रंग के साथ के साथ खुशबू भी अच्छी तरह चढ़ जाती है । चाय के साथ एक मुरमुरे वाली  नमकीन भी थी जो मैंने खुद बनाई थी । नमकीन के साथ होने के दो मुख्य कारण थे।  पहला तो यह, कि  मुझे ज्यादा मीठा पसंद नहीं, दूसरा कारण शायद यह था कि जिंदगी में किसी का साथ मिल जाए ना तो जिंदगी आसान हो जाती है ।  एक नमक और एक चीनी, याद है बचपन में जब मम्मी खाने में ज्यादा नमक और मसाले पसंद करती थी।  खाने के बाद पापा एक रसगुल्ला खिला कर सबकुछ ठीक कर देते थे। "ले अब मिर्च नहीं लगेगी" । समय बीत गया है मम्मी ने मसाले कम कर दिए हैं लेकिन जब भी जिंदगी में नमक कम लगता है तो चुटकी भर नमक मिलाकर सब ठीक कर देती हैं । रसगुल्ला अब मम्मी नहीं खा पाती, डायब...