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अजी सुनिए !

 अंकल..मुझे आज ही यहां शिफ्ट करना है, मैं ज्यादा इंतज़ार नहीं कर सकती, मैंने दरवाज़े पर खड़े हुए, विनमतापूर्वक कहा । अंकल आंटी ने मुझे हैरानी से देखा, फिर आंटी ने चिंता जताते हुए कहा, "बेटा आप कैसे रहोगे आज, रूम में फर्नीचर भी नहीं है, सफ़ाई भी नहीं हुई है यहां, मुझे काफ़ी बुरा लग रहा है ।
 मैंने  मुस्कुराते हुए आंटी से कहा "आप टेंशन मत लीजिए आंटी, मैं सफाई कर लूंगी, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। 
        रात में करीब दस बजे अंकल आंटी आए । आंटी ने पूछा "बेटा ! पीले पर्दे मिले हैं आप को कोई दिक्कत तो नहीं है ?" इस बार भी मेरा जवाब हां ही था। आंटी थोड़ी सी शख्त मिज़ाज  हैं लेकिन अंकल खुश मिज़ाज हैं । पर्दे टांगने कहां हैं, कितनी दूरी पर ड्रिल करना है सब आंटी उन्हें बता बता रही थीं "अजी, जरा ध्यान से करिएगा, कितना वक्त लगा रहे हैं, जल्दी कर दीजिए । इतने में आंटी का फोन बजा, वो कॉल अटेंड करने के लिए कमरे से बाहर चली गईं । अंकल ने सीढ़ी पर खड़े रहते हुए मुड़कर पीछे देखा, ठीक है जी ? आंटी को कमरे में ना पाकर, अंकल बाहर निकल कर बोले "अजी सुनिए, एक बार आकार देख लीजिए, पीले पर्दे टांग दिए हैं। 
  अकसर औरतें अपने पति को  "अजी" कहकर बुलाती हैं नाम नहीं ले सकती ना, क्योंकि समाज सवाल उठाएगा ।
 हमारे समाज का आईना यानी फिल्में, हिंदी फ़िल्मों में भी यहीं दिखाया गया ना कि ओह जीजी, क्या कहके तुम उनको बुलाओगी? दूल्हा बनके जो आयेंगे। 
दुल्हल बनकर भी तो कोई जायेगी, उसे आप क्या बुलाएंगे ?
 जब मैंने अंकल की आवाज़ में " अजी सुनिए" सुना तो थोड़ी देर के लिए मैं आश्चर्य में पड़  गई और फिर सोचा अंकल ने कितनी आसानी से एक समांतर संबंध का जीवन्त उदाहरण दिया है ।  मैंने तो प्रत्येक पुरूष को अपनी स्त्री का नाम लेते ही सुना है। समानता उनके लिए सिर्फ काला अक्षर भैंस बराबर है । आशा है एक दिन हर स्त्री काम के साथ नाम में भी समानता प्राप्त कर लेगी । 


Comments

  1. बेटा जी इंसान ही अपनी ज़बान से अपने साथी को इज़्ज़त दे सकता है।
    और अगर ये इज़्ज़त अपने ज़िंदगी के हमसफ़र को दें तो ज़िंदगी सफलतम हो जाती है।

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